8th Pay Commission Fitment Factor: 8वां वेतन आयोग के तहत 2.8 का फिटमेंट फैक्टर फाइनल, कर्मचारियों की सैलरी में बड़ी बढ़ोतरी

8th Pay Commission Fitment Factor: आठवा वेतन आयोग के तहत कितना फिटमेंट फैक्टर होगा। यह लगभग तय होता हुआ दिख रहा है सरकारी कर्मचारी अक्सर यह सोच लेते हैं कि फिटमेंट फैक्टर 2.5 या फिर 2.8 हुआ तो उनकी सैलरी में कितनी बढ़ोतरी होगी। जैसे कि 150% है उससे ज्यादा उनकी सैलरी में बढ़ोतरी होगी। लेकिन हकीकत इससे काफी अलग रहता है तो हकीकत में कितना सैलरी में बढ़ोतरी इन फिटमेंट फैक्टर से होने वाला है।

जब भी आठवां वेतन आयोग को लेकर चर्चा शुरू होती है तो सबसे ज्यादा जिन शब्दों पर ध्यान रहता है वह है फिटमेंट फैक्टर सरकारी कर्मचारी अक्सर यहां पर यह मान लेते हैं कि अगर फिटमेंट फैक्टर 2.5 या 2.8 हुआ तो उनकी सैलरी 150% या उससे ज्यादा यहां पर बढ़ सकती है। लेकिन हकीकत इससे काफी अलग रहता है असली जो बढ़ोतरी है इतना बड़ा बड़ी नहीं होती है। क्योंकि इसमें काफी अहम रोल रहता है महंगाई भत्ता का मर्जर का आखिर 8वां आयोग के तहत पूरी जानकारी बताई गई है।

आठवां वेतन आयोग के तहत जानिए क्या है फिटमेंट फैक्टर

सबसे पहले यह समझने वाली बात है कि फिटमेंट फैक्टर क्या होता है क्योंकि बहुत से कर्मचारी अभी फिटमेंट फैक्टर के बारे में नहीं जानते जो कि यह एक मल्टीप्लायर रहता है जो कि नई बेसिक सैलरी इससे तय होता है। जब नया वेतन आयोग लागू कर दिया जाता है तब तक कर्मचारियों का महंगाई भत्ता मिल रहा होता जो कि हर 6 महीने में बढ़ोतरी होता है। कई बार नया आयोग लागू हो जाने कि महंगाई भत्ता 100% या उससे ज्यादा यहां पर पहुंच जाता है ऐसे में पहले मौजूदा बेसिक पे में जमा हुआ जो महंगाई भत्ता वह जोड़ दिया जाता है उसके बाद फिटमेंट फैक्टर लागू कर दिया जाता है यानी जो रकम पहले से मिल रहा होता है उसे समुचित करने के बाद असली बढ़ोतरी निकल पाता है।

यहां इससे साफ होता है की सबसे साफ उदाहरण सातवें वेतन आयोग के दौरान देखने को मिला है। उस समय फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था। महंगाई भत्ता करीब 125 फ़ीसदी था मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी ₹7000 था तो 125 फ़ीसदी महंगाई भत्ता जोड़ने पर कुल सैलरी 15750 किया गया है 2.57 का नया बेसिक तय हुआ था तो 18000 रुपए न्यूनतम बेसिक सैलरी बना था। यानी असली बढ़ोतरी सिर्फ 2250 रुपए रहा है। जो कि लगभग 14.3% था यानी 157 फ़ीसदी जैसी देखने वाली बढ़ोतरी असल में करीब 14 फ़ीसदी निकला।

पुराने वेतन आयोग के रिकॉर्ड को देखा जाए तो असली बढ़ोतरी 14% से 31% के बीच रहा है। छठे वेतन आयोग में जरूर 54% का बड़ा छलांग देखने को मिला था। लेकिन इसके बाद 7वा वेतन आयोग में बढोत्तरी फिर से सीमित रहा है यही वजह है कि आठवीं वेतन आयोग से भी 150% जैसी उम्मीदें लगाना पूरी तरीके से व्यावहारिक नहीं है।

जानिए फिटमेंट फैक्टर को लेकर क्या है नियम

बता दिया जाता है की फिटमेंट फैक्टर सिर्फ एक बेसिक पेपर लागू रहता है। अंतिम इन हैंड सैलेरी में हर ट्रांसपोर्ट अलाउंस व अन्य भत्ते सम्मिलित रहते हैं जो कि शहर व पद के हिसाब से अलग-अलग रहते हैं। इसलिए कुल वेतन पर असर व्यक्ति विशेष के अनुसार बदल सकता है। पिछले ट्रेंड को देखा जाए तो 15% से 30% के बीच यह वास्तविक बढ़ोतरी ज्यादा यथार्थ माना जाता है। हां अगर सरकार 2.86 जैसा ज्यादा फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी प्रदान करती है तो इसका असर काफी बड़ा हो सकता है। फिलहाल अधिकारिक घोषणा का कर्मचारी इंतजार कर रहे हैं और फिटमेंट फैक्टर को देखकर सैलरी बढ़ोतरी का अंदाजा लगाना अभी सही तस्वीर नहीं झलकती।

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